राहुल गांधी को राहत: "Commander-in-Thief" टिप्पणी वाले मानहानि केस में ट्रायल पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ख़िलाफ़ मुंबई की गिरगाँव मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रहे आपराधिक मानहानि ट्रायल पर रोक लगा दी। मामला 2018 में रफ़ाल विवाद के दौरान प्रधानमंत्री मोदी पर कथित "Commander-in-Thief" टिप्पणी से जुड़ा है।
राहुल गांधी को एक पुराने मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है।
मामला क्या है
शिकायतकर्ता एम एच श्रीश्रीमाल का आरोप है कि राहुल गांधी ने 20 सितंबर 2018 को राजस्थान में एक भाषण में रफ़ाल विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "Commander-in-Thief" और "चोरों का सरदार" कहा था। गिरगाँव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 28 अगस्त 2019 को गांधी के ख़िलाफ़ process जारी की थी।
अब तक का घटनाक्रम
| तारीख़ | घटना |
|---|---|
| 20 सितंबर 2018 | राजस्थान में कथित भाषण |
| 28 अगस्त 2019 | गिरगाँव कोर्ट ने समन जारी किया |
| 8 सितंबर 2026 | बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2019 का समन रद्द करने से इनकार किया |
| 13 अक्टूबर 2026 | सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पर रोक लगाई |
सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की बेंच ने निचली अदालत की कार्यवाही पर फ़िलहाल रोक लगाई और गांधी की याचिका पर नोटिस जारी कर चार हफ़्ते में जवाब माँगा। गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी पेश हुए।
ध्यान दें
यह अंतरिम आदेश है। इसका मतलब यह नहीं कि केस ख़त्म हो गया; सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों को सुनने के बाद आगे फ़ैसला करेगा।
परीक्षा के लिए: भारत में मानहानि दीवानी और आपराधिक दोनों हो सकती है। आपराधिक मानहानि अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 में है, जो पहले IPC की धारा 499-500 में थी।
स्रोत: Outlook
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राहुल गांधी पर किस टिप्पणी को लेकर केस है?
2018 में रफ़ाल विवाद के दौरान PM मोदी पर कथित "Commander-in-Thief" टिप्पणी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
गिरगाँव कोर्ट के ट्रायल पर फ़िलहाल रोक और चार हफ़्ते में जवाब माँगा।
