पेपर लीक रोकने को "आख़िरी मिनट" में बनें प्रश्न-पत्र? नीलेकणी टास्क फ़ोर्स AI और question bank पर कर रहा विचार
NEET-UG 2026 पेपर लीक के बाद बना नंदन नीलेकणी की अगुवाई वाला परीक्षा सुधार टास्क फ़ोर्स विचार कर रहा है कि प्रश्न-पत्र परीक्षा से ठीक पहले बड़े question bank से या AI की मदद से बनाए जाएँ, ताकि पहले से बेचने लायक कोई पेपर ही न रहे। सिफ़ारिशें गठन के तीन महीने के भीतर, यानी अक्टूबर के अंत तक, आने की उम्मीद है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक से करोड़ों छात्रों का भरोसा डगमगाया है। केंद्र का टास्क फ़ोर्स अब इस समस्या की जड़ पर सवाल उठा रहा है।
टास्क फ़ोर्स के बारे में
| बात | जानकारी |
|---|---|
| अध्यक्ष | नंदन नीलेकणी (Infosys के सह-संस्थापक) |
| घोषणा | 26 जुलाई 2026, प्रधानमंत्री ने |
| गठन | 28 जुलाई 2026 |
| वजह | NEET-UG 2026 पेपर लीक के बाद विरोध |
| सिफ़ारिशें | गठन से तीन महीने में |
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को भी बताया है कि यह पैनल सुधारों की सिफ़ारिश करेगा।
किन विचारों पर काम
- बड़ा question bank: परीक्षा से ठीक पहले बैंक से पेपर तैयार हो, ताकि कोई तय पेपर पहले मौजूद ही न हो।
- AI से पेपर: परीक्षा के दिन ही AI की मदद से प्रश्न-पत्र बनाना।
- CBT का विस्तार: कंप्यूटर आधारित परीक्षा बढ़ाना, जिसके लिए परीक्षा केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाना होगा। देश में अभी करीब 1.5 लाख test locations हैं।
नीलेकणी ने कहा, "why do we need to have something called a question paper?" उनके मुताबिक जैसे ही प्रश्न-पत्र बनता है, उसे बेचने का आर्थिक लालच पैदा हो जाता है।
छात्रों के लिए इसका मतलब
अगर ये सुझाव लागू होते हैं, तो आने वाले सालों में ज़्यादा परीक्षाएँ कंप्यूटर पर और हर उम्मीदवार के लिए अलग-अलग प्रश्न सेट के साथ हो सकती हैं। ऐसे में सिर्फ़ रटने के बजाय concepts पर पकड़ और कंप्यूटर पर mock test का अभ्यास और ज़रूरी होगा।
स्रोत: Business Standard
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
परीक्षा सुधार टास्क फ़ोर्स के अध्यक्ष कौन हैं?
Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी।
टास्क फ़ोर्स किन उपायों पर विचार कर रहा है?
परीक्षा से ठीक पहले बड़े question bank या AI से पेपर बनाना और CBT का विस्तार।
